~ आरक्षण एक बवाला ~

By : सौरव

आज 2015 में जब हमारे सवाल ये होने चाहिए कि कैंसर का इलाज़ क्या है, या दूसरे ग्रहों की खोज के लिए क्या नयी तकनीक इज़ात की जा सकती है, या आने वाले पीढ़ियों के लिए प्रदुषण रहित वातावरण देने में आज की तकनीक में क्या परिवर्तन किया जाना चाहिए, हम हमारी जाती, हमारा धर्म, हमारा कुत्ता, हमारी बिल्ली से आगे नहीं बढ़ना चाहतेl कुछ मुठ्ठी भर लोग मिल कर मंगल तक एक यान भेज देते हैं और पूरा 130 करोड़ का देश छाती ठोक ठोक कर गर्व से खुशियां मनाता है कि हम मंगल तक पहुँच गए, अब हम किसी से कमज़ोर नहीं हैं! और अगले दिन, सड़कों पर गाड़ियां जलाके वही छातियाँ पीट पीट कर आरक्षण के लालच में, खुद के बाकियों से कमजोर होने का दावा करते हैं l

संविधान के रचयिता भी क्या बवाल छोड़ गए हैं, उन्होंने सोचा भी न होगा, जो आरक्षण दबे कुचले वर्ग को मुख्य धारा से मिलाने की युक्ति है, वह एक दिन चुनाव में वोट आरक्षित करने का हथकंडा बनके रह जायेगा l आज गली गली आरक्षण बंट रहा है और उसके साथ बंट रहा है ये देश, सब थोड़ा थोड़ा काट के ले जाओ! पर सवाल आता है की मान लो सबको आरक्षण दे दिया फिर क्या? क्या ये लालची आंदोलन बंद हो जायेंगे? सवाल जटिल होगा पर जवाब सीधा है, हम मनुष्य हैं हमारी भूख नहीं मिटती साहब, जो दे दोगे उसकी आदत हो जाएगी, फिर कुछ नया चाहिए l आज हम फलानी जाती के हैं इसलिए आरक्षण मिल जाए, तो कल हम सांवले हैं इसलिए, परसों हम नपुंशक हैं इसलिए आरक्षण चाहिए l

Punekar News's photo.मुझे आज के आधुनिक समाज मे जातियों और धर्म के बंटवारे की कोई जगह नहीं दिखती, हाँ गरीबी और अमीरी की खायी है और बढ़ती जा रही है, आरक्षण देना है तो सारा उनको दो जो सैंकड़ों की तादात में रोज़ भूंके मरते हैं l उन सैंकड़ों की मौत मिल कर भी 21 इंची अखबार के पन्ने में से एक इंच से ज्यादा नहीं जुटा पाती, वहीँ हतियार लहराते हुए कुछ हष्ट पुष्ट गुंडे रास्ता रोक कर अखबार का पूरा पन्ना ले जाते हैं l हंसी तो तब आती है जब लोग सवाल करते हैं कि अगर गरीब इतने ही परेशान हैं, तो उन्होंने कभी आंदोलन क्यों नहीं किया? साहब मानव जाती कमजोर की पैरोकार नहीं, हाँ उनकी दशा पर शोक व्यक्त कर सकती है पर आकर्षण सिर्फ ताकतवर से है. आप खुद को ही देख लीजिये, कभी कोई सफ़ेद कपड़ों मे, सोने की चेन पहने कॉर्पोरेटर आपकी गाड़ी में टक्कर भी मार दे तो आप खुद सॉरी कह कर, हाँथ जोड़ कर निकल जाएंगे, वहीँ कोई फेरी वाला अगर गाड़ी के सामने आजाये, तो उसकी बहन से लेकर माँ तक सबका नामकरण कर दिया जायेगा l हार्दिक पटेल कोई बाहर का नहीं हम सबमें व्याप्त कमजोरियों का स्वरुप भर है l

एक ज़माना था जब ये सब देख कर खून खौल उठता था अब बस मायूसी होती है, ये जान कर कि इन बेवकूफियों का कोई अंत नहीं, आज पटेल आंदोलन है तो कल हिन्दू मुस्लिम का मुद्दा होगा या कुछ और. खैर जिस देश में युवाओं के प्रेरणा स्त्रोत टैगोर का ‘एकला चलो’ न होकर हनी सिंह का ‘चार बोतल वोदका’ हो वहां अपेक्षाओं के लिए जगह बचती भी नहीं.

धन्यवाद  |

Jago Party – Let us remove Crime, Corruption & Reservation Yo! Yo! Honey Singh Ravindra Nath Tagore Narendra Modi Arvind Kejriwal Devendra Fadnavis Shivraj Singh Chouhan Nitish KumarAkhilesh Yadav Vashundra raje

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