डर का कोई मज़हब नही होता!!!!!! भय का कोई भगवान नही होता!!!!!!!

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By : Rahul Mishra

क्या आपकी रूह नही काँप उठेगी जब रात को दस बजे सत्तर-अस्सी हथियार-बंद लोगों की भीड़ आपके दरवाजे पीट रही हो? और आप अपनी बूढ़ी माँ, आठ साल की बच्ची और सत्रह साल की एक बहन के साथ अपने घर में बंद हो.. चाकू, तलवार और आग लिए भीड़ का एक जत्था आपके घर मे घुसने के लिए लगातार खिड़की-दरवाजे तोड़ रहा हो..आपकी माँ अच्छी तरह सुन पा रही है उन गालियों को जो आपके पूरे परिवार को बाहर से दी जा रही है.. गाली देने वालों में कुछ आवाज़ें आपके अपने पड़ोसियों की हैं..आपकी बच्ची सहम कर चारपाई के नीचे दुबक गयी है और आपकी बहन ये सोच के डर रही है कि क्या होगा जब ये भीड़ किसी बाढ़ की तरह अंदर घुसती चली आएगी..

इस ख़ौफ़नाक मंज़र के बारे में सोचिए जब आपका फोन पुलिस वाले उठाएँगे नहीं…भागने के कोई रास्ता नही होगा, आज कोई क़ानून या सुनवाई नहीं होगी… आपकी जान, आपकी बच्ची का भविष्य और आपकी बहन की इज़्ज़त भीड़ के रहम-ओ-करम पे होगी..जैसे जैसे दरवाजा कमजोर पड़ रहा है, वैसे वैसे आपकी आँखों में डर बढ़ रहा है.. आपकी बहन माँ से चिपकी थर थर कांप रही है, आपकी बेटी अभी भी चारपाई के नीचे रो रही है… आपकी माँ उपर वाले को याद करती हुई कभी अपनी बेटी को देखती है तो कभी आपको..

ज़रा उस भयानक मंज़र के बारे मे सोचिए जब अचानक खिड़की टूट जाती है और उसमे से जलता हुआ एक टायर आपके ठीक सामने आ के गिरता है.. ज़रा उस दिल दहला देने वाले पल के बारे मे सोचिए जब दरवाजे की कुण्डी भीड़ के धक्के से टूटने लगती है.. और अब तक आप समझ चुके हैं कि भीड़ और आपके बीच बस वही कमजोर दरवाजे की कुण्डी है जो अगले ही पल टूटने वाली है, और… अचानक दरवाजा टूट गया …भीड़ का एक हिस्सा आपको दबोच लेता ओए भीड़ का दूसरा हिस्सा एक एक कर आपकी बहन की ओर ललचाई नज़र से बढ़ रहा है… अब आगे क्या ? ज़रा सोचिए अब आगे क्या???

ये लेख तब और डरावना हो जाता है जब मात्र एक अफवाह की वजह से ये भीड़ आपके घर के बाहर आ खड़ी हुई हो. इस लेख के द्वारा मैं पढ़ने वाले सभी साथियों से अनुरोध करता हूँ कि बे-वजह किसी भी अफवाह को ना फ़ैलाएँ ना ही उनपे यकीन करें. हिंदू मुस्लिम एकता इतनी कमजोर ना होने दे कि लाउड स्पीकर के नफ़रत भरे बोल किसी बेकसूर की मौत का कारण बन जाए.

मो. अख़लाक़ नाम के एक इंसान की मौत हो चुकी है मगर अब इंसानियत की मौत ना होने दें.

मैं नही जानता आपका मज़हब क्या है… मैं नही जानता मो. अख़लाक़ को मारने वाली भीड़ का मज़हब क्या है?

मगर हाँ, डर का कोई मज़हब नही होता!!!!!! भय का कोई भगवान नही होता!!!!!!!

(Rahul Mishra is a mechanical engineer having deep interest in literature, arts, writing, poetry, psychology, sports and social-political matter. He is highly active on social media such as Facebook. He writes small articles, poems and sarcastic content  on popular social and political issues.)