महाराष्ट्र: परराज्य के कामगारों की घर जाने की इच्छा को ध्यान में रखते हुए, विशेष ट्रेन की व्यवस्था करने की मांग लेकर  मुख्यमंत्री का पुन:उच्चारण !!! 

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मुंबई, दि. 21/04/2020 : परराज्य के जो कामगार महाराष्ट्र में अटके हुए है, उनकी निवारा केंद्र के माध्यम से उत्तम तरह से व्यवस्था की जा रही है। साधारणत: छह लाख स्थलांतरित कामगार और मजदूरों के खाने की एवं अन्य व्यवस्था की है, उनकी ज़िम्मेदारी राज्य सरकार ने ली है, फिर भी वे लोग घर जाना चाहते है। कई बार वे लोग आंदोलन करने की राह पर भी होते है। अगर ३० अप्रैल के बाद १५ मई तक विषाणु का प्रकोप बढ़ने का अनुमान केंद्र सरकार व्यक्त करेंगे, और अब जो अवधि है, इन सभी बातों को ध्यान में रखकर परराज्य के अटके हुए इन कामगार और मजदूरों को उनके मूल गाँव भेजने के लिए स्पेशल ट्रेन की व्यवस्था की जा सकती है क्या? इस पर केंद्र सरकार विचार करें या सोचे, अप्रैल के अंतिम तक इस संदर्भ की मार्गदर्शक सूचना भी निर्गमित करने की मांग प्रधानमंत्री और रेलवे मंत्रालय की ओर किए जाने का पुन:उच्चारण मुख्यमंत्री ने किया।

            अतिरिक्त केंद्रीय सचिव मनोज जोशी की अध्यक्षता में पाँच लोगों की केंद्रीय टीम महाराष्ट्र में आई है और मुख्यमंत्री ने वीडियो कॉनफरंसिग के माध्यम से उनसे संवाद साधा, इस दौरान वे बोल रहे थे। इस संवाद में स्वास्थ्य मंत्री राजेश टोपे, मुख्यसचिव अजोय मेहता, केंद्रीय टीम के सदस्य, बृहन्मुंबई महानगरपालिका आयुक्त प्रविण परदेशी और मुंबई पुलिस आयुक्त परमवीर सिंग के समेत वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

            परराज्य के लोगों की तरह ही राज्य के नागरिक भी जिन-जिन जिलों में अटके हुए है, उनके लिए यह निर्णय बहूत ही महत्वपूर्ण साबित होने की बात मुख्यमंत्री ने कहीं। उन्होंने कहा कि परराज्य के नागरिक घर जाते समय शुरू से अंत तक  (एंड टु एंड) यानि उनके घर तक का उनका निरिक्षण किया जा सके, उन्हें वहाँ पर क्वारंटाईन किया जा सके और विषाणु का प्रकोप न बढ़ सके, इस बात का ध्यान रखकर, ऐसी व्यवस्था का निर्माण कर ही उन्हें भेजा जा सकता है क्या? इस पर विचार करते हुए केंद्र सरकार की ओर समय रहते ही निर्णय लिया जाए।

अन्य देशों के मरीजों एवं स्थिति का अध्ययन हो

            राज्य के ८० फीसदी मरीजों में कोराना के लक्षण ही दिखाई नहीं देते, इसके पीछे क्या वजह है, विश्वभर की क्या स्थिति है, महाराष्ट्र में जिन दुबई और अमेरिका से विषाणु का प्रवेश हुआ है,  उस अमेरिका के बारे में पता है, लेकिन दुबई में कौन-सा उपाययोजन किया जा रहा है, वे कहाँ सही है और कहाँ गलत है इन सभी बातों का अध्ययन करने की आवश्यकता मुख्यमंत्री ने इस दौरान व्यक्त की।

योद्ध्यांओं के लिए सुरक्षा के संसाधन होने ही चाहिए! केंद्र ने राज्य की मांग को पूरा करना चाहिए  

            मुख्यमंत्री ने कहा कि आपदा के दिनों में योद्ध्या की तरह लढनेवाले डॉक्टर्स, नर्सेस और स्वास्थ्य कर्मचारियों की सुरक्षा महत्वपूर्ण है। उनके लिए पीपीई किटस, वेंटीलेटर्स और अन्य मांगें जो राज्य की ओर से की जा रही है, उसकी पुर्तता केंद्र सरकार की ओर से जल्द से जल्द की जानी चाहिए। इस संदर्भ में भविष्य की जरूरत को भी ध्यान में रखना चाहिए।

            राज्य ने स्वास्थ्य विषयक सुविधाएं बढ़ाई है। कोरोना अस्पताल के साथ-साथ अलगीकरण बेड की संख्या भी बढ़ाई है। जरूरत पड़ने पर वॉर फुटिंग पर जैसे सेना के जरिये से अस्पताल का निर्माण किया जाता है, वैसे अस्पताल का निर्माण करने की दृष्टि से मार्गदर्शन भी मांगा है। आपदा की गंभीरता को ध्यान में रखते हुए उसका सुनियोजित आरेखन करने के कामों को गति दिये जाने की बात भी मुख्यमंत्री ने कहीं।

खाना नहींखाद्य-पदार्थ, अनाज दिया जाए

            मरीजों का अस्पताल में आने का गोल्डन अवर महत्वपूर्ण है, यह कहते हुए मुख्यमंत्री ने बताया कि जिनके पास रेशनकार्ड नहीं है, उन्हें अनाज देते समय अनाज और खाद्य इस संदर्भ के केंद्र के नियम शिथील करने की मांग की। धूप के दिनों में पकाया हुआ खाना देने से, वह धूप के कारण ख़राब भी हो सकता है। साथ ही इससे लोगों को क्षति भी हो सकती है। इस बात को ध्यान में रखते हुए रेशनकार्ड नहीं है, ऐसे लोगों को पकाया हुआ खाना देने के बजाए खाद्य-पदार्थ-अनाज दिया जाए, उसके वितरण की ज़िम्मेदारी राज्य सरकार की ओर से ली जाएगी, ऐसे होने पर आपदा की स्थिति में काम करनेवाली व्यवस्था पर ज़िम्मेदारी में भी कमी होगी यह कम से कम होगी।

मुंबई-पुणे में पहले के नियम ही लागू रहेंगे

            मुख्यमंत्री ने बताया कि लॉकडाऊन के कारण कोरोना का प्रकोप दोगुना होने की अवधि में वृद्धि हुई है। केंद्र सरकार के ही मार्गदर्शक सुचनाओं के अनुसार ग्रीन और ऑरेंज झोन के जिलों में कुछ सीमित व्यवहारों को नियम एवं शर्तों के अधीन रहकर मान्यता दी गई है। लेकिन मुंबई और पुणे महानगरपालिका क्षेत्र के विषाणु के प्रकोप के हालातों को देखते हुए इन दोनों जगहों पर लॉकडाऊन में लाई गई शिथीलता रद्द की गई है।

            मुख्यमंत्री ने इस टीम से कहा कि कोरोना विषाणु से केंद्र और राज्य सरकार मिलकर लढ रहा है। इस पर आपका मार्गदर्शन और सुचना होगी तो, आप उसे खुले दिल से कहें, हमें इस मुसीबत से जल्द से जल्द ही बाहर निकलना है।

सुरक्षा संसाधन भी दिये जाये – राजेश टोपे

            स्वास्थ्यमंत्री टोपे ने राज्य की स्वास्थ्य सुविधाओं की जानकारी देते हुए जो उपाययोजन किए जा रहे, उसकी जानकारी दी और केंद्र सरकार की ओर की गई पीपीई कीटस, वेंटीलेटर की मांग समेत अन्य मांगों की पुर्तता जल्द से जल्द किए जाने की मांग भी इस दौरान की। डायलेसिस, ह्दय और किडनी रोग, मधुमेह के मरीजों को स्वास्थ्य सुविधा उपलब्ध कराने के लिए राज्य सरकार ने नॉनकोविड अस्पताल शुरू किए है।  सरकारी डॉक्टर्स की तरह ही निजी अस्पतालों में भी डॉक्टर्स की ओर से ही सुरक्षा संसाधनों की मांग होने की बात भी उन्होंने कहीं।

            प्रविण परदेशी ने बृहन्मुंबई के  उपायोजनाओं को लेकर जानकारी दी। व्यवस्था को आवश्यक ऐसी सुविधाओं की मांग भी उन्होंने इस दौरान की। प्रदीप व्यास ने राज्य के १० जिलों में एक भी  ॲक्टीव्ह केस नहीं है, मुंबई पुणे, नागपुर और मालेगाँव को छोड़कर अन्य क्षेत्र में डबलिंग का रेट १८ से २१ दिनों का होने की जानकारी भी उन्होंने इस टीम को दी।

केंद्रीय टीम की ओर से वरली कोलीवाडे कोराना मुक्ति की प्रशंसा महाराष्ट्र के प्रकोप के डबलिंक रेट को किया स्पष्ट

            वरळी कोलीवाडा यह देश के कोरोना मुक्ति का एक उत्तम उदाहरण हो सकता है, यह कहते हुए केंद्रीय सचिव श्री. जोशी ने महाराष्ट्र के कोरोना बाधितों की अवधि दोगुनी होने के दिनों में वृद्धि होने की बात कहीं। उन्होंने कहा कि  महाराष्ट्र के कुछ अच्छी बातों का यहाँ पर जिक्र करना होगा। महाराष्ट्र का डबलिंक रेट ६.३ है और  मुंबई का ४.३. वरली, कोलीवाडे की तरह ही अन्य कंटेंनमेंट झोन में भी काम किए जाने पर इस विषाणु की शुंखला को तोड़ने में मदद होगी।

            केंद्रीय टीम ने वरली, कोलीवादा को आज भेट भी दी। इस दौरान टीम ने उनके निरीक्षण में जो निष्कर्ष आया, उसे मुख्यमंत्री के समक्ष रखा। जिसमें प्रमुखता से डोअर टु डोअर सर्वे पर ज़ोर दिया जाए, यह काम करनेवाली  स्वंयसेवकों की  संख्या बढ़ाई जाए, इन दिनों राज्य के अस्पतालों में पर्याप्त स्वास्थ्य सुविधा उपलब्ध है, लेकिन भविष्य में उसकी आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए महापालिका के अन्य कोरोना अस्पतालों में सुविधा बढ़ाई जाए, कंटेनमेंट क्षेत्र में लॉकडाऊन का कड़े से पालन हो, हायरिस्क पेशंट पर ध्यान केन्द्रित किया जाए, झोपडपट्टी क्षेत्र में प्रकोप न बढ़े, संदिग्ध केसेस का शिफ्टींग करने पर विचार किया जाए, स्थलांतरीत  जिनके पास रेशनकार्ड नहीं है, उनके लिए खाद्य-पदार्थों का वितरण को लेकर नीति बनाई जाए। इन सभी बिंदुओं को रखा गया।

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